नई
दिल्ली ,जासं। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल को एक बड़ी कामयाबी मिली है।
स्पेशल सेल ने वसंतकुंज में ग्रैंड होटल के पास बृहस्पतिवार देर रात
मुठभेड़ में कुख्यात बदमाश सुरेंद्र मलिक उर्फ नीतू दाबोदिया समेत उसके
गिरोह के तीन बदमाशों को मार गिराया। मारे गए दूसरे बदमाश की पहचान आलोक
गुप्ता के रूप में हुई है। तीसरा मृतक दीपक बताया जा रहा है। हालांकि अभी
तक पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
नीतू दाबोदिया पर कुल सात लाख रुपये का इनाम था और उस पर दिल्ली , हरियाणा व पंजाब में हत्या,
वसूली, लूटपाट, हत्या का प्रयास, कार चोरी आदि के करीब 50 मामले दर्ज हैं। नीतू दाबोदिया दिल्ली का
मोस्टवांटेड अपराधी था। इसके अलावा पंजाब व हरियाणा पुलिस को लंबे समय से उसकी तलाश थी।
स्पेशल
सेल को सूचना मिली थी कि दाबोदिया अपने साथियों के साथ वसंतकुंज इलाके
में आने वाला है। इसलिए पुलिस ने घेराबंदी कर रखी थी। पुलिस के अनुसार
ग्रैंड होटल के पास कार में सवार दाबोदिया का पुलिस से सामना हुआ। पुलिस
को देखकर दाबोदिया व उसके साथियों ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी
जवाबी कार्रवाई करते हुए बदमाशों की कार पर फायरिंग की। कार में तीन लोग
सवार थे। तीनों ही मुठभेड़ में मारे गए।
नीतू
दाबोदिया व उसका साथी मनोज मुरखेड़ी पिछले साल गुड़गांव पुलिस की हिरासत से
फरार हो गए थे। गुड़गांव पुलिस दोनों को साकेत कोर्ट में पेश करने लाई थी।
पेशी के बाद दोनों द्वारका इलाके से फरार हो गए थे और गुड़गांव पुलिस
कर्मियों के हथियार भी छीन ले गए थे। हालांकि बाद में मनोज को दिल्ली
पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बाहरी दिल्ली में एक मुठभेड़ के दौरान पकड़ लिया
था। मुठभेड़ में मनोज का एक साथी मारा गया था। पर दाबोदिया फरार चल रहा था।
वह दिल्ली पुलिस के हवलदार रामकिशन की हत्या का भी आरोपी है। रामकिशन ने
पिछले साल जौंती बॉर्डर पर नीतू दाबोदिया और उसके साथियों को तलाशी के लिए
रोका था। इस क्रम में दाबोदिया और उसके साथी हवलदार रामकिशन की हत्या कर
फरार हो गए। हवलदार की हत्या के बाद से दिल्ली पुलिस ने दाबोदिया पर एक लाख
रुपये का इनाम घोषित किया था। इसके अलावा पंजाब व हरियाणा पुलिस ने भी
इनाम घोषित किया था। दिल्ली पुलिस और उसके बीच कई बार मुठभेड़ हुई। पर वह हर
बार चकमा देकर फरार हो जाता था। इस साल फरवरी में हरियाणा के सिरसा में
स्पेशल सेल व पंजाब पुलिस के साथ दाबोदिया के गिरोह का आमना सामना
हुआ। जिसमें दाबोदिया का एक साथी दयानंद घायल होने के कारण पकड़ा गया था। जबकि दाबोदिया
गोली लगने के बाद भी फरार होने में कामयाब रहा था।
Source: News in Hindi
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