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Tuesday, August 13, 2013

Why Fixing is Uncontrollable, Now Fixing in BPL


BPL

ढाका। मैच फिक्सिंग, स्पॉट फिक्सिंग, ब्रैकेट फिक्सिंग, अपने देश में फिक्सिंग, विदेशी दौरे पर फिक्सिंग, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में फिक्सिंग या फिर घरेलू व विदेशी लीग में फिक्सिंग, आजकल जहां देखो खिलाड़ी इससे पीछे नहीं हट रहे। आखिर खेल में अच्छा खासा पैसा मिलने के बावजूद ऐसा क्यों हो रहा है? ताजा मामला है बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल) का जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रवैया अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) ने मैच फिक्सिंग से संबंधी अपराध के लिए सात लोगों को अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया, जबकि दो अन्य पर रिपोर्ट नहीं करने का आरोप लगाया गया है। 

हैंसी क्रोन्ये-मोहम्मद अजहरुद्दीन का 1999-2000 के मैच फिक्सिंग कांड के बाद से दुनिया भर में फिक्सिंग आइसीसी के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी थी, इसके बाद 2010 के लॉ‌र्ड्स टेस्ट में पाकिस्तान के तीन खिलाड़ियों, आसिफ, आमिर व बट के स्पॉट फिक्सिंग कांड में लिप्त पाए जाने का खुलासा और फिर आइपीएल सीजन 6 का फिक्सिंग कांड..यह सब कुछ थमने की बजाए एक उग्र रूप लेता जा रहा है और अब दुनिया की हर लीग से ऐसी खबरें सामने आ रही है। आइसीसी ने ताजा मामले में बांग्लादेश प्रीमियर लीग में नौ व्यक्तियों को फिक्सिंग मामले में घेरा है हालांकि उनके नाम नहीं बताए। उसने कहा कि इन सभी के खिलाफ अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और उनके नामों की घोषणा संपूर्ण प्रक्रिया पूरी होने के बाद की जाएगी। बयान में कहा गया है कि ये आरोप ढाका ग्लैडियेटर्स फ्रेंचाइजी के बीपीएल 2013 के मैचों के दौरान मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग में संलिप्त रहने की कथित साजिश और इस साजिश में शामिल होने के लिए किए गए प्रयासों की सूचना नहीं देने से संबंधित हैं। 

इसके अनुसार जिन पर फिक्सिंग से संबंधित अधिक गंभीर आरोप लगाए गए हैं उन्हें अस्थायी तौर पर निलंबित किया गया है तथा उन्हें अनुशासनात्मक प्रक्रिया पूरी होने तक बीसीबी, आइसीसी या आइसीसी के सदस्य संघों द्वारा आयोजित क्रिकेट गतिविधियों में भाग लेने से तुरंत प्रभाव से रोक दिया गया है। जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं उन्हें खुद का बचाव करने के लिए 14 दिन का समय दिया गया है।

जाहिर है कि अभी आइपीएल फिक्सिंग कांड की जांच जारी ही है और इससे पहले कि कोई बड़े नतीजे सामने आते, विश्व के दूसरे कोनों से फिक्सिंग की ताजा खबरें आए दिन फैंस को दहलाती रहती हैं। हाल में पाकिस्तान के कैरेबियाई दौरे पर भी यही सवाल उठे थे जिसमें पाक टीम के खेलने के रवैये को संकेत माना गया था, इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय हो या घरेलू टूर्नामेंट, आए दिन एक नया कांड सामने आ ही रहा है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या फिक्सिंग के इस जाल पर आइसीसी काबू पाने में सक्षम है या फिर पूरी तरह से असमक्षम और बेबस।

Original Found Here... http://www.jagran.com/cricket/headlines-why-fixing-is-uncontrollable-now-fixing-in-bpl-10646300.html

Sunday, August 11, 2013

Dawood Phone Call Open Match Fixing Scandal


IPL


भूपेन पटेल [मिड-डे] मुंबई। क्रिकेट को धर्म का दर्जा देने वाले देश को झकझोर कर रख देने वाले आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग का खुलासा किसी छुटभैये सट्टेबाज नहीं बल्कि अंडरव‌र्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के फोन से ही हुआ था। यह कॉल सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसीज के प्रयासों से इंटरसेप्ट (अलग करना) की गई थी। उसी कॉल से यह पता चला कि पाकिस्तान में डी कंपनी का सट्टेबाजी सिंडीकेट उसके विश्वस्त डॉ. जावेद चुटानी, सलमान और एहतेशाम चला रहे हैं।

यह सिंडीकेट तीन स्तर पर फैला हुआ था। पहले स्तर में दाऊद, छोटा शकील, चुटानी, रमेश व्यास, फिरोज, जितेंद्र जैन तथा चंद्रेश जैन उर्फ जुपिटर शामिल थे। दूसरे में सुनील भाटिया, चंद्रेश पटेल और मनन भंट्ट जैसे सट्टेबाज थे, जबकि तीसरे स्तर में अमित कुमार, मनीष गुड्डेवार तथा बाबू राव यादव जैसे फिक्सर व खिलाड़ी शामिल थे, जो चंदीला, श्रीसंत जैसे खिलाड़ियों को सुविधाएं देकर मैदान पर स्पॉट फिक्सिंग को अंजाम देते थे।
पाकिस्तानी सिंडीकेट दिल्ली, नागपुर, गुजरात, जयपुर, हैदराबाद, कोलकाता और अन्य जगहों पर काम कर रहे बुकीज के संपर्क में था। ये बुकीज फिक्सरों और स्थानीय क्रिकेटरों की मदद से अपने सट्टेबाजी सिंडीकेट के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को फिक्स करते थे।

Original Found Here... http://www.jagran.com/cricket/headlines-dawood-phone-call-open-match-fixing-scandal-10639694.html

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