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Tuesday, June 17, 2014

FIFA World Cup: Brazil not thinking of revenge against Mexico, says Hulk

Brazilian striker Hulk. Pic/AFP
Brazil striker Hulk insists revenge is not on the agenda as the World Cup hosts bid to all but secure their place in the last 16 against rivals Mexico today.

Mexico shattered Brazil's dream of winning the only major prize missing from their honours list two years ago, when they stunned the South Americans 2-1 to claim the Olympic gold medal in London.

But Hulk insists there is no question of Brazil looking to settle a score as they face the Mexicans at Fortaleza's Castelao Stadium.

It is the same venue where they met in the group stage of the Confederations Cup last year when Luiz Felipe Scolari's side claimed a 2-0 victory.

That success means a measure of revenge has already been exacted, and forward Hulk insisted that Brazil will only have one thing on their minds come kick-off on Tuesday.

Keeping it simple
"In the Confederations Cup we tried to think only about winning the game and it will be the same this time. If we think about revenge it could cause us problems," said the powerful forward, who scored in the Olympic final clash...


From mid-day News

Saturday, June 7, 2014

Andy Murray v Rafael Nadal, French Open 2014 semi-final: live


Andy Murray (left) leaves the court defeated as Rafael Nadal (right) celebrates his victory
The King of Clay, Rafa Nadal, proves just too strong for Britain's Andy Murray - 6-3, 6-2, 6-1.

Nadal looks poised to win a fifth straight French Open, and ninth overall. In truth, it was a mauling. Statistically, Murray's worst result in a Slam. Nadal had a swagger, and his precision, power and spin on his treasured red surface was just too much.

Murray has had his best tournament since his back surgery, however. Nothing today - however grisly - suggests he cannot win at Wimbledon, to retain the crown he worked so hard to capture. Different surface, contrasting vibe. But Nadal - he is special, isn't he? Actually the first semi-final was more entertaining. Unfancied Latvian Ernests Gulbis lost the first two sets to Novak Djokovic but then found some inspiration.

Djokovic wilted in the heat. Both players seemed to have niggles. Gulbis won the first set. But the Serb held on. You wouldn't bet on him in the final, however... not against Nadal....


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From telegraph.co.uk News

Friday, June 6, 2014

Andy Murray must prove he has what it takes to win Grand Slam against Rafa Nadal

John McEnroe says Andy Murray’s semi-final clash with Rafa Nadal on Friday will prove if the Wimbledon ­champion is back as a genuine Grand Slam contender.

The British No.1 has reached the last four at a Major for the first time since his Wimbledon triumph last year by coming through five-set thrillers against Philipp Kohlschreiber and Gael Monfils.

But the world No.8 has yet to beat a top 10 player since ending ­Britain’s 77-year wait for the title last July – and has lost his three matches against other members of the Big Four.

He has also had to contend with back surgery and splitting with coach Ivan Lendl since his second Grand Slam title.

Murray faces the massive mission of ending the Spanish King of Clay’s long reign at Roland Garros.

The world No.1 has won eight French Open titles while only ever losing one match here and is on a 33-match unbeaten run at the clay-court Major...

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From mirror.co.uk News

Wednesday, September 4, 2013

Morgan-Bopara Break Azharuddin-Jadeja Record


Eoin Morgan

नई दिल्ली। भारत के मुहम्मद अजहरुद्दीन और अजय जडेजा का वनडे क्रिकेट में पांचवें विकेट पर 223 रन की साझेदारी का 16 साल पुराना रिकॉर्ड टूट गया। इंग्लैंड के इयान मोर्गन और रवि बोपारा ने मंगलवार को डबलिन में आयरलैंड के खिलाफ एकमात्र वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच में पांचवें विकेट के लिए 226 रन की अटूट साझेदारी करके भारतीय जोड़ी को पीछे छोड़ दिया। मोर्गन ने नाबाद 124 और बोपारा ने नाबाद 101 रन बनाए।

अजहर और जडेजा ने 17 अगस्त, 1997 को श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में पांचवें विकेट के लिए 223 रन जोड़े थे। अजहर और जडेजा दोनों ने उस मैच में शतक जमाए थे, लेकिन भारत दो रन के करीबी अंतर से मैच हार गया था। इसके बाद मोर्गन और बोपारा की साझेदारी से पहले केवल एक बार पांचवें विकेट के लिए 200 रन से अधिक की साझेदारी निभाई गई। माइकल क्लार्क और एंड्रयू साइमंड्स सात दिसंबर, 2005 को न्यूजीलैंड के खिलाफ वेलिंगटन में अजहर और जडेजा का रिकॉर्ड तोड़ने के करीब पहुंच गए थे। दोनों पांचवें विकेट के लिए 220 रन जोड़े थे। 

Original.. http://www.jagran.com/cricket/headlines-morganbopar-break-azharuddinjadeja-record-10698838.html

From streets of Delhi to pitches of Australia, Birthday boy Ishant comes a long way


Ishant Sharma, Indian Cricketers, Indian Cricket Team, Fast Bowler

नई दिल्ली। हुनर किसी का मोहताज नहीं होता, वो तो बस बहता पानी है जो अपना रास्ता खुद बना लेता है..दिल्ली में आज ही के दिन 1988 में जन्मेंइशांत शर्मा इसका एक बेहतरीन उद्हारण हैं। शायद ही किसी ने सोचा था कि शहर की गलियों से क्रिकेट खेलते-खेलते वह एक दिन ऑस्ट्रेलिया के मशहूर एडिलेड मैदान पर भारतीय क्रिकेट इतिहास की दूसरी सबसे तेज गेंद (152.6 किलोमीटर प्रति घंटा) फेंकने का गौरव हासिल करेगा।
दिल्ली के एक मध्यमवर्गी परिवार से ताल्लुक रखने वाले इशांत के पिता बचपन में ही समझ गए थे कि इशांत बड़ा होकर एक क्रिकेटर बनेगा और भारतीय टीम के लिए भी खेलेगा। इसे एक पिता की दूरदर्शी सोच का इत्तेफाक से हकीकत में बदलना कहें, या अपने बेटे पर उनका अटूट भरोसा.दोनों ही सही साबित हुए जब पहली बार 2007 में इशांत भारतीय जर्सी पहनकर मैदान पर खेलने उतरे। इशांत के पिता ने कई बार इस बात का जिक्र किया है कि इशांत क्रिकेट का दीवाना था और वह इस बात को अच्छी तरह समझ चुके थे, और उसकी प्रतिभा को भी..उसके बाद से संघर्षपूर्ण जीवन के बावजूद अपने परिवार के पालन के साथ-साथ इशांत के पिता ने अपने बेटे की हर उस मांग को पूरा किया जो उसे उसके सपने के करीब ले जा सके और वह सपना आखिर सच भी हुआ।
अंडर-19 विश्व कप में धमाल मचाने के बाद सुर्खियों में आए इशांत को यूं तो 18 साल की उम्र में ही 2006-07 के भारत के दक्षिणी अफ्रीकी दौरे के लिए बुलावा आ गया था, लेकिन कुछ कागजी पचड़ों व आयोजन खामियों की वजह से वह उस दौरे पर नहीं जा सके, हालांकि उन्हें ज्यादा दिन इंतजार नहीं करना पड़ा और मई 2007 में उन्हें बांग्लादेश के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला, जबकि ठीक उसके अगले महीने ही उन्हें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना वनडे डेब्यू करने का मौका भी मिल गया। उसके बाद इशांत ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, 6 फुट 5 इंच के अभी तक के इस सबसे लंबे गेंदबाज को शुरुआत से ही प्यार से लंबू के नाम से पुकारा जाता रहा। बेशक उनके जीवन में भी बाकी दिग्गज क्रिकेटरों की तरफ उतार-चढ़ाव आए लेकिन हर बार उनकी वापसी करने की क्षमता ने उन्हें भारतीय टीम में बरकरार रखा। वह 2011 में 100 टेस्ट विकेट लेने वाले पांचवें सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने। आज 51 टेस्ट मैचों में 144 विकेट और 57 वनडे मैचों में 79 विकेट, उनके हुनर व कामयाबी को बयां करता है। खासतौर पर ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर उनके कहर से कंगारू टीम हमेशा त्रस्त रही, इनमें कप्तान रिकी पोंटिंग का नाम सबसे ऊपर आता है जो कई बार इशांत की गेंद पर चूके और पवेलियन लौट गए। महानतम क्रिकेटर पोंटिंग ने भी इशांत को एक बेहतरीन गेंदबाज बताया था।

Original.. http://www.jagran.com/cricket/headlines-from-streets-of-delhi-to-pitches-of-australia-birthday-boy-ishant-comes-a-long-way-10692476.html

Gambhir Returns to India Due to Family Reasons


Gautam Gambhir

लंदन। काउंटी क्रिकेट में एसेक्स की तरफ से खेल रहे भारतीय सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर काउंटी सीजन को बीच में छोड़कर अचानक भारत वापस लौट आए हैं। उनके लौटने का कारण पारिवारिक बताया जा रहा है।
एसेक्स ने अपने जारी बयान में कहा, 'गौतम गंभीर रविवार को पारिवारिक कारणों से भारत लौट गए हैं। फिलहाल एसेक्स क्रिकेट और गौतम इससे ज्यादा बताने की स्थिति में नहीं है। एसेक्स क्रिकेट पूरी तरह गौतम के समर्थन करता है और उम्मीद करता है कि 2013 इंग्लिश घरेलू क्रिकेट सत्र के अंत से पहले वह (गंभीर) वापस लौट आएंगे।' गंभीर का एसेक्स के साथ सफर पिछले ही महीने शुरू हुआ था और शुरुआत में काफी पारियों में वह फ्लॉप साबित हुए, जिनमें 31, 21, 2 और शून्य रन की पारियां मौजूद रहीं हालांकि महीने के अंत में 30 तारीख को वह ब्रिस्टल में ग्लूस्टरशर के खिलाफ ड्रॉ हुए मैच में शतक ठोंकने में सफल रहे। गंभीर काफी लंबे समय से टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं और आखिरी बार वह जनवरी में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे मैच में भारत की तरफ से खेले थे।

Original.. http://www.jagran.com/cricket/headlines-gambhir-returns-to-india-due-to-family-reasons-10692484.html

I asked Aleem not to touch me: Clarke


Ashes 2013

सिडनी। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच पांचवें और आखिरी एशेज टेस्ट का अंत सुखद नहीं रहा। ड्रॉ रहे इस टेस्ट में क्लार्क और अंपायरों के बीच बहस सुर्खियों में रही। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान माइकल क्लार्क ने अंपायर अलीम डार को उन्हें न छूने की चेतावनी भी दे डाली।
'द ऑस्ट्रेलियन' ने कहा कि माइकल क्लार्क ने विवादों के बीच खत्म हुए पांचवें टेस्ट के दौरान अंपायर डार से कहा कि उन पर से हाथ हटा लें। क्लार्क के हवाले से अखबार ने कहा, 'मुझे याद नहीं कि मैंने क्या कहा। मुझे याद है कि अलीम ने मुझे छुआ था और मैंने उनसे कहा कि मुझे न छुएं क्योंकि यदि मैंने उन्हें छुआ तो मुझे तीन मैचों का निलंबन झेलना पड़ेगा।' 

अखबार ने यह भी कहा कि जिस तरह अंग्रेज दर्शकों ने क्लार्क की हूटिंग की, वह अपमानजनक थी क्योंकि उनकी अपनी टीम ने पूरे मैच में नकारात्मक क्रिकेट खेली थी। डेली टेलीग्राफ ने कहा कि अंपायरों को भविष्य में खराब रोशनी को लेकर बेहतर फैसले लेने चाहिए।

Original.. http://www.jagran.com/cricket/bouncer-i-asked-aleem-not-to-touch-me-clarke-10673695.html

Australia Need To Do Good Batting


sunil gavaskar

(सुनील गावस्कर) इंग्लैंड इस समय शानदार फॉर्म में चल रहा है और उसे रोकने के लिए ऑस्ट्रेलिया कुछ नहीं कर पा रहा है। यह बिल्कुल इस साल की शुरुआत में भारत में फरवरी-मार्च में खेली गई सीरीज जैसी स्थिति है। उस समय भी ऑस्ट्रेलिया ने ऐसे मौके पर मैच गंवाया था, जहां लग रहा था कि मैच ड्रॉ की ओर बढ़ रहा है। उनकी बल्लेबाजी ताश के पत्तों की ढह रही है और अगर जब तक कोई एक बल्लेबाज वैसी पारी नहीं खेलेगा, जैसी कि माइकल क्लार्क ने तीसरे टेस्ट मैच में खेली थी, तो इंग्लैंड को पांचवां टेस्ट जीतने में कोई मुश्किल होती नहीं दिख रही।

बल्लेबाजी लाइन अप में बदलाव होना तय है और उस्मान ख्वाजा का बाहर होना सुनिश्चित है। वह अच्छी शुरुआत करने में सफल रहे और विकेट पर कुछ समय भी बिताया, लेकिन वह हमेशा मुश्किल में ही नजर आए। लॉ‌र्ड्स में अर्धशतक बनाने के बावजूद कमेंटेटर और मीडिया ऐसे बात कर रही थी, जैसे कि वह ऑस्ट्रेलियाई न हों। निश्चित तौर पर वह पूरी तरह से ऑस्ट्रेलियाई नहीं हैं, लेकिन पहले भी ऐसा कई बार हुआ है, जब यूरोप आकर बसे प्रवासियों के बच्चों ने ऑस्ट्रेलियाई टीम का प्रतिनिधित्व किया। इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा कि उनका नाम ऑस्ट्रेलियाई है या नहीं। अगर ऑस्ट्रेलिया ने अपनी बल्लेबाजी में सुधार नहीं किया और गेंदबाजों के लिए पर्याप्त रन नहीं बनाए तो ओवल में भी मैच चौथे दिन ही खत्म होता दिखाई देगा।

पीठ में परेशानी के चलते टिम ब्रेसनन मैदान में नहीं उतर पाएंगे। इससे बहुत से लोगों को हैरानी होनी चाहिए कि आधुनिक दिनों के ट्रेनिंग कार्यक्रम में वजन उठाने की ट्रेनिंग आदर्श स्थिति है या नहीं। तेज गेंदबाजी हर तरह से एक मुश्किल काम है, इससे शरीर पर सबसे ज्यादा जोर पड़ता है और जब शरीर को मजबूती की जरूरत होती है, तो क्या वजन उठाना सही है, यह बड़ा सवाल है। स्टुअर्ट ब्रॉड भी चोटों से जूझ रहे हैं, लेकिन जब वह फिट होते हैं तो वह एक मैच टर्नर साबित होते हैं। जब ऑस्ट्रेलिया 299 के लक्ष्य का पीछा कर रहा था, तब उन्होंने बिल्कुल ऐसा ही किया। चालाकी से शॉर्ट गेंद का उपयोग करते हुए ब्रॉड ने अपनी गेंदबाजी में अच्छी विविधता दिखाई। मैच में 11 विकेट लेकर उन्होंने टेस्ट करियर में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। (पीएमजी)

Original... http://www.jagran.com/cricket/cricket-australia-need-to-do-good-batting-10651912.html

Monday, September 2, 2013

Everywhere Talks About Sachin Retirement But Sachin Comments Calmly


Sachin Tendulkar

देवाशीष दत्ता (मिड-डे), कोलकाता। चैंपियन बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के 200वां टेस्ट खेलने के साथ संन्यास की खबरें भले ही क्रिकेट प्रेमियों में चर्चा की केंद्र बनी हुई हैं, लेकिन मास्टर ब्लास्टर अपने भविष्य की योजना प्रशंसकों को बताने की जल्दबाजी में नहीं हैं।

पढ़ें: क्या सचिन पर डाला जा रहा है दबाव
अपने संन्यास की खबरों को लेकर तेंदुलकर ने एक न्यूज चैनल को एसएमएस किया, 'अभी कोई टिप्पणी नहीं..मैच दर मैच देखा जाएगा।' सचिन का बल्ला पिछले काफी दिनों से खामोश रहा है। शतकों का यह बादशाह पिछली 38 टेस्ट पारियों में एक भी सैकड़ा नहीं लगा सका है। नवंबर, 2011 में उन्होंने वानखेड़े स्टेडियम में वेस्ट इंडीज के खिलाफ 94 रनों की पारी खेली थी। यह उनकी इस दौरान सबसे बड़ी टेस्ट पारी थी।

Original Found Here... http://www.jagran.com/cricket/headlines-everywhere-talks-about-sachin-retirement-but-sachin-comments-calmly-10695118.html

Thursday, August 29, 2013

1936 Berlin Final of Dhyan Chand Traced


Dhyan Chand

नई दिल्ली। ध्यानचंद, यह वह नाम है जिसे क्रिकेट की दीवानगी के बीच आज का युवा शायद ही पहचाने लेकिन अगर कोई ऐसा वीडियो मिल जाए जिससे देश भर के लोगों को यह दिखाया जा सके कि आखिर ध्यानचंद (Major Dhyan Chand) में क्या खूबी थी और क्यों दुनिया भर की हॉकी टीमें इस वन मैन आर्मी से कांपती थीं, तब शायद यह लोगों के जहन में बिठाया जा सके कि सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) से आगे भी एक दुनिया है। अब यह सपना सच हो सकता है क्योंकि खबरों के मुताबिक जर्मनी में मौजूद एक ऐसा दुर्लभ वीडियो मिल गया जिसमें 1936 बर्लिन ओलंपिक में दद्दा (ध्यानचंद) के वह कारनामे शामिल हैं इस पीढ़ी ने कभी देखा तक नहीं।

एक खबर के मुताबिक ध्यानचंद के पुत्र अशोक ध्यानचंद को ध्यानचंद पर रिसर्च करने वाले हेमंत दुबे ने एक ऐसे वीडियो की खोज कर ली है जिसमें बर्लिन ओलंपिक फाइनल में भारत की ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उस फाइनल मैच में उस समय 31 वर्षीय ध्यानचंद ने गोल की हैट्रिक लगाई थी, जिसने जर्मनी की हार तय कर दी थी। उनके इस शानदार प्रदर्शन से मैदान पर मौजूद मेजबान देश के तानाशाह एडॉल्फ हिटलरभी सन्न रह गए थे और उन्होंने भी ध्यानचंद की जमकर तारीफ की थी। खबरों के मुताबिक उसी मैच के दौरान बर्लिन के मशहूर नाजी फिल्म निर्माता लेनी राइफेंसटाल ने इस मैच के ज्यादातर अंश अपने कैमरे में कैद कर लिए थे। एक अंग्रेजी अखबार को दिए गए इंटरव्यू में ध्यानचंद के पुत्र अशोक ध्यानचंद ने बताया है कि उन्होंने और हेमंत दुबे ने इस मामले में जर्मन कंसलेट के जरिए सीधे जर्मनी में राइफेंसटाल के परिवार से संपर्क साधा है और उन्हें उम्मीद है कि अगर सरकार ने साथ दिया तो वह उन टेप को भारत लाने में सफल रहेंगे।

Original Found Here.. http://www.jagran.com/news/sports-1936-berlin-final-of-dhyan-chand-traced-10681759.html

Wednesday, August 21, 2013

Didnt Play Cricket in School But Now Ishwar Pandey Playing for Fndia


Ishwar Pandey

नई दिल्ली। कुछ लोगों के लिए जिंदगी की ट्रेन उस पटरी पर चलती है जहां कई स्टेशन होते हैं जबकि कुछ जब उसी ट्रेन पर सवार होते हैं तो वह एक्सप्रेस का रुख अख्तियार कर सीधे मंजिल पर जाकर ही रुकती है.. मध्यप्रदेश के युवा क्रिकेट इश्वर पांडे भी उन्हीं में से एक हैं। जहां एक तरफ बाकी युवा खिलाड़ी बचपन से ही मैदान में जुट जाते हैं ताकि एक दिन देश के लिए खेल सकें, वहीं दूसरी तरफ इश्वर जैसे खिलाड़ी भी होते हैं जिन्हें 12वीं की परीक्षा तक क्रिकेट से कोई लेना-देना तक नहीं था और आज वह दक्षिण अफ्रीका की कठिन पिचों पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।

नाम- इश्वर पांडे, उम्र-24, जन्म स्थान- रीवा (मध्यप्रदेश)..भारत के सबसे बड़े राज्य के एक छोटे से शहर से आने वाले इश्वर पांडे दक्षिण अफ्रीका में दक्षिण अफ्रीका 'ए' के खिलाफ भारत 'ए' से खेलते हुए अपने डेब्यू पर हीरो बनकर उभरे हैं। इश्वर ने इस मैच की पहली पारी में 19 ओवरो में महज 46 रन देकर चार अहम विकेट लिए जबकि दूसरी पारी में 9.5 ओवर में उन्होंने 25 रन देकर तीन और विकेट हासिल किए। इश्वर पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक आज से पांच साल पहले इस क्रिकेटर का इस खेल से कोई लेना-देना भी नहीं था। स्कूल के आखिरी दिनों में गर्मियों की छुंिट्टयों में उन्होंने अपने दोस्तों के साथ सिर्फ मस्ती के लिहाज से एक क्रिकेट ट्राइल में मौका आजमाने का मन बनाया और फॉर्म भर डाला। दरअसल, वह क्रिकेट ट्राइल मध्यप्रदेश डीविजनल क्रिकेट की रीवा टीम के लिए था। यहां पर उनकी लंबी चौड़ी कद काठी और गेंद फेंकने की अद्भुत क्षमता से सब इतना प्रभावित हुए कि वह जल्द ही रीवा से खेलने भी लगे और कुछ ही दिनों में रणजी सीजन के एक खिलाड़ी ने इश्वर की गेंदों को देखा तो वह हैरत में रह गए और उन्होंने लोकल क्लब में इस खिलाड़ी की चर्चा शुरू की।

इश्वर के पिता (एक पूर्व सैनिक) चाहते थे कि इश्वर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें और उनका खेल से जुड़ना काफी मुश्किल नजर आ रहा था, हालांकि उनके यूनिवर्सिटी कोच ने इश्वर के पिता को मनाया और जल्द ही इश्वर मध्यप्रदेश की अंडर-19 टीम के लिए भी खेलने लगे। शुरुआती दौर खराब रहा लेकिन इश्वर को अब आगे बढ़ने का चस्का लग चुका था। पिताजी का दबाव जारी थी लेकिन अपने क्रिकेट के जोश की खातिर इश्वर ने पढ़ाई की स्ट्रीम ही बदल डाली और कॉलेज में विज्ञान से आ‌र्ट्स स्ट्रीम में नाम दर्ज करा दिया ताकि क्रिकेट को ज्यादा समय दे सकें।

इसी बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर व मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अमय खुरसिया ने इश्वर की प्रतिभा देखी और उन्हें चेन्नई की एमआरएफ पेस अकादमी भेजने का फैसला लिया। इसके बाद जो बदलाव इश्वर में आए उसने सभी की आंखें खोल दीं। स्कूल के बाद पांच साल के अंदर आज इश्वर घरेलू क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक हर जगह चर्चा में हैं। पिछले रणजी सीजन में वह टूर्नामेंट के सर्वाधिक विकेट लेने वाले खिलाड़ी भी रहे। उन्होंने मध्यप्रदेश की तरफ से खेलते हुए 48 विकेट चटकाए और इस दौरान उन्होंने कुछ मैचों में बल्ले से भी अपना जलवा दिखाया। आइपीएल-6 में वह पुणे वॉरियर्स से खेले लेकिन ज्यादा कुछ कर नहीं पाए लेकिन कभी हार ना मानने वाले इस क्रिकेटर को दक्षिण अफ्रीका के भारत 'ए' दौरे पर चयनकर्ताओं ने मौका दिया और अपने इस डेब्यू में ही उन्होंने 7 अहम विकेट लेकर भविष्य का उभरता हुआ गेंदबाज बनने की दस्तक दे डाली। छह फुट दो इंच लंबे चौड़े इस गेंदबाज की रफ्तार और स्विंग इसका सबसे बड़ा हथियार है और जिस रफ्तार में पिछले पांच साल उनकी जिंदगी में अलग मोड़ लेकर आए हैं, ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि जल्द ही हमें शायद टीम इंडिया के लिए एक और शानदार फर्राटा गेंदबाज मिल जाए।

Tag: Ishwar Pandey, Cricket Player, Hindi News, News in Hindi, News

Monday, August 19, 2013

Is Sehwag Career on the Verge of End


Virender Sehwag

(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। वीरेंद्र सहवाग..एक ऐसा खिलाड़ी जो फैंस के लिए कई बार टीम की स्थिति और हार-जीत से बढ़कर था। जब वह बल्लेबाजी करने उतरते थे तो कुछ फैंस बस उनकी बल्लेबाजी का लुत्फ उठाने के लिए ही मैच देखा करते थे। एक ऐसा धुरंधर जो कभी अपनी मुस्कान के जरिए विरोधी टीम के दिल जीत लेता था तो कभी उस मुस्कान के बीच लगाए गए धुआंधार शॉट्स से विरोधी गेंदबाजों के होश उड़ाता था। भारत के लिए दोनों प्रमुख फॉर्मेट (वनडे व टेस्ट) में सर्वाधिक स्कोर जड़ने वाला यह दिग्गज आज गुम सा गया है। अब सहवाग के करीबी दोस्तों के रूप में देखे जाने वाले पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भी कुछ ऐसी बातें की जिनमें कहीं ना कहीं वीरू के संन्यास की बात छुपी नजर आती है, सवाल यही है कि कहां है सहवाग? क्या वाकई उनका करियर खत्म है?

हाल ही में सहवाग के अच्छे दोस्तों में से माने जाने वाले पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने उन कुछ खिलाड़ियों का नाम लिया जिनकी टीम में वापसी जल्द हो सकती है, लेकिन कभी जिस खिलाड़ी के दम पर मैच जीतने वाले और आए दिन उनकी तारीफों के पुल बांधने वाले दादा ने इस फेहरिस्त में सहवाग का नाम तक नहीं लिया। जाहिर है कि दादा और सहवाग का रिश्ता काफी मजबूत माना जाता था, ऐसे में कहीं गांगुली का यह इशारा वाकई इस तरफ तो नहीं कि वीरू का करियर अब समाप्त है? दादा ने अपने बयान में जल्द वापसी करने वालों में गौतम गंभीर, युवराज सिंह और जहीर खान का नाम लिया लेकिन वह सहवाग को इस सूची में शामिल नहीं कर पाए।

Original Found Here.. http://www.jagran.com/cricket/headlines-is-sehwag-career-on-the-verge-of-end-10658543.html

Tag: Virender Sehwag, Verge of end, Hindi News, News in Hindi, News

Wednesday, August 14, 2013

After Sachin Now Kallis Also Might Take ODI Retirement


Jaques Kallis

नई दिल्ली। हाल ही में जब अचानक सचिन तेंदुलकर ने वनडे क्रिकेट से संन्यास लिया था तो भारतीय क्रिकेट के साथ-साथ विश्व क्रिकेट को भी करारा झटका लगा था। अब ऐसा ही झटका जल्द दक्षिण अफ्रीका को भी लग सकता है क्योंकि खबरों के मुताबिक उनका सबसे अनुभवी खिलाड़ी और धमाकेदार ऑलराउंडर जैक्स कालिस भी वनडे से संन्यास लेने की कगार पर हैं।

दरअसल, कालिस ने पिछले 18 महीनों से वनडे क्रिकेट में हिस्सा नहीं लिया है। पूर्व कोच गैरी कर्सटन ने अपने कोच के तौर पर कार्यकाल के दौरान जब यह कहा था कि कालिस को अब छोटे फॉर्मेट की चिंता छोड़ देनी चाहिए क्योंकि वह दक्षिण अफ्रीकी टेस्ट टीम के लिए बहुत माएने रखते हैं। तभी से कालिस ने वनडे टीम से मुंह मोड़ लिया था, हालांकि कर्सटन ने कालिस के लिए बड़े वनडे टूर्नामेंटों के दरवाजे खुले रखे थे लेकिन नए कोच रसेल डॉमिंगो इस आइडिए से इत्तेफाक नहीं रखते। खबरों के मुताबिक डॉमिंगो ने कहा है कि, 'अगर जैक्स को 2015 विश्व कप में खेलना है तो उन्हें कुछ वनडे मैच इस दौरान खेलने होंगे। अगर ऐसा नहीं होता है तो यह बाकी खिलाड़ियों के साथ न्याय नहीं होगा।'

खबरों के मुताबिक डॉमिंगो मौजूदा टीम के साथ ही 2015 विश्व कप की रणनीति बनाने में जुटे हैं और फिलहाल इस रणनीति में कालिस कहीं फिट नहीं हो रहे क्योंकि वह इस प्रारूप में पूरी तरह से एक्टिव नहीं हैं। डॉमिंगो ने यह भी साफ संकेत दे दिया कि वह ज्यादा दिनों तक कालिस का इंतजार भी नहीं करेंगे क्योंकि उन्हें अपने प्लान और ट्रेनिंग को आगे बढ़ाना होगा। उधर, दूसरी तरफ खबर है कि जैक्स कालिस भी अब वनडे खेलने के मूड में नहीं हैं। उनके दौर के अन्य दिग्गज सचिन तेंदुलकर और रिकी पोंटिंग के वनडे से संन्यास लेने के बाद अब इस ऑलराउंडर में भी वनडे को हमेशा के लिए अलविदा कहने की हिम्मत जाग उठी है और मुमकिन है कि जल्द ही वह इससे जुड़ी घोषणा कर भी दें। कालिस इस समय वनडे क्रिकेट में रन बनाने के मामले में छठे स्थान पर हैं, जबकि टॉप-5 में मौजूद चार दिग्गज (सचिन, पोंटिंग, जयसूर्या और इंजमाम उल हक) पहले ही इस प्रारूप से संन्यास ले चुके हैं। 

कालिस का वनडे करियर:
मैच, रन, शतक, औसत
321, 11498, 17, 45.26

Original Found Here... http://www.jagran.com/cricket/headlines-after-sachin-now-kallis-also-might-take-odi-retirement-10646338.html

14 August: Today Is Special Day For Cricket, Sachin And Don Careers


Sir Donald Bradman

(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। समय का पहिया कभी-कभी ऐसे इत्तेफाक पैदा करता है जो ना सिर्फ दिलचस्प होते हैं बल्कि हैरान भी कर देते हैं। क्रिकेट फैंस के लिए आज की तारीख यानी 14 अगस्त उसी समय के पहिये की कहानी बयां करता है जिसने सालों के फासलों के बीच दो महानतम क्रिकेटरों के करियर का अंत और आगाज लिखा। हम बात कर रहे हैं विश्व क्रिकेट के अब तक के सबसे महान खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया के सर डॉन ब्रैडमैन और आज क्रिकेट के भगवान के तौर पर जाने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की। आइए आपको बताते हैं कि आखिर कैसे हुआ एक क्रिकेटर के करियर का दुखद: अंत और ठीक उसकी तरह इतिहास रचने वाले दूसरे खिलाड़ी का धमाकेदार आगाज। 

1. डॉन ब्रैडमैन (14 अगस्त, 1948):
भारत की आजादी के ठीक एक साल बाद ऑस्ट्रेलिया में एक महान क्रिकेटर के करियर का अंत हो गया। यह दिन बहुत खास था क्योंकि यह सर डॉन ब्रैडमैन के करियर का मैदान पर आखिरी दिन था और उनका करियर औसत (99.94) 100 पर पहुंचने के लिए बेताब था। सर डॉन ब्रैडमैन को इंग्लैंड के खिलाफ ओवल स्टेडियम पर खेले गए उस मैच में महज 4 रनों की जरूरत थी जो ना सिर्फ उनके करियर औसत को सौ प्रतिशत करते बल्कि टेस्ट में उनके 7000 रन भी पूरे हो जाते। इससे बढि़या अंत और कुछ नहीं हो सकता था लेकिन..कभी किसी भी गेंदबाज के सामने नहीं झुकने वाले सर डॉन इस बार अपनी दूसरी ही गेंद पर एरिक होलीस का शिकार हुए और बोल्ड होकर मैदान से चलते बने। पूरे मैदान में सन्नाटा था, या यह कहें कि विश्व क्रिकेट में हर फैन सन्न रह गया था। उम्मीद थी कि अगली पारी में डॉन आकर इस आंकड़े को पूरा करेंगे लेकिन शायद यह उनकी किस्मत में ही नहीं था क्योंकि इंग्लैंड वह मैच पहले ही हार गया और ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी की नौबत ही नहीं आई। यही था एक परफेक्ट खिलाड़ी के करियर का अजीबोगरीब अंत। 

2. सचिन तेंदुलकर (14 अगस्त, 1990):
डॉन ब्रैडमैन के करियर के उस अंत के बाद सालों तक कोई ऐसा खिलाड़ी नहीं मिला जो उनके स्तर की बराबरी कर सके। कई आए और कई गए, लेकिन उनके जैसा कोई आता नहीं दिखा। फिर आइ वह तारीख लेकिन तकरीबन 42 साल बाद.. 14 अगस्त 1990 को भारत और इंग्लैंड के बीच जारी टेस्ट सीरीज के दूसरे टेस्ट का आखिरी दिन था और मैनचेस्टर के मैदान पर भारत को 408 रनों की जरूरत थी। टॉप ऑर्डर लड़खड़ा चुका था और टीम इंडिया 183 रन पर छह विकेट खो चुकी थी। फिर आए सचिन रमेश तेंदुलकर जो पहली पारी में 68 रन जड़ चुके थे लेकिन दूसरी पारी में दबाव भी ज्यादा था और तकरीबन दो घंटों का समय बाकी था, फिर हुआ वह जिसने तमाम क्रिकेट प्रेमियों की आंखें ऐसे खोलीं कि वह आज तक खुली ही हुई हैं। 17 वर्षीय सचिन ने 189 गेंदों का सामना करते हुए 17 चौकों की मदद से अपने टेस्ट व अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला शतक जड़ा और नाबाद 119 रनों की पारी खेली, वह मनोज प्रभाकर (नाबाद 67) के साथ मिलकर भारत को दिन के अंत तक ले गए और हार के मुंह से भारत को निकालते हुए एक ड्रॉ नसीब कराया। वह इतनी कम उम्र में शतक जड़ने वाले दुनिया के तीसरे खिलाड़ी बने और दुनिया में संकेत भेज दिया कि 42 साल के इंतजार के बाद क्रिकेट को नया डॉन मिल गया है।

Original Found Here... http://www.jagran.com/cricket/headlines-14-august-today-is-special-day-for-cricket-sachin-and-don-careers-10646344.html

Tuesday, August 13, 2013

Why Fixing is Uncontrollable, Now Fixing in BPL


BPL

ढाका। मैच फिक्सिंग, स्पॉट फिक्सिंग, ब्रैकेट फिक्सिंग, अपने देश में फिक्सिंग, विदेशी दौरे पर फिक्सिंग, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में फिक्सिंग या फिर घरेलू व विदेशी लीग में फिक्सिंग, आजकल जहां देखो खिलाड़ी इससे पीछे नहीं हट रहे। आखिर खेल में अच्छा खासा पैसा मिलने के बावजूद ऐसा क्यों हो रहा है? ताजा मामला है बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल) का जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रवैया अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) ने मैच फिक्सिंग से संबंधी अपराध के लिए सात लोगों को अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया, जबकि दो अन्य पर रिपोर्ट नहीं करने का आरोप लगाया गया है। 

हैंसी क्रोन्ये-मोहम्मद अजहरुद्दीन का 1999-2000 के मैच फिक्सिंग कांड के बाद से दुनिया भर में फिक्सिंग आइसीसी के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी थी, इसके बाद 2010 के लॉ‌र्ड्स टेस्ट में पाकिस्तान के तीन खिलाड़ियों, आसिफ, आमिर व बट के स्पॉट फिक्सिंग कांड में लिप्त पाए जाने का खुलासा और फिर आइपीएल सीजन 6 का फिक्सिंग कांड..यह सब कुछ थमने की बजाए एक उग्र रूप लेता जा रहा है और अब दुनिया की हर लीग से ऐसी खबरें सामने आ रही है। आइसीसी ने ताजा मामले में बांग्लादेश प्रीमियर लीग में नौ व्यक्तियों को फिक्सिंग मामले में घेरा है हालांकि उनके नाम नहीं बताए। उसने कहा कि इन सभी के खिलाफ अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और उनके नामों की घोषणा संपूर्ण प्रक्रिया पूरी होने के बाद की जाएगी। बयान में कहा गया है कि ये आरोप ढाका ग्लैडियेटर्स फ्रेंचाइजी के बीपीएल 2013 के मैचों के दौरान मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग में संलिप्त रहने की कथित साजिश और इस साजिश में शामिल होने के लिए किए गए प्रयासों की सूचना नहीं देने से संबंधित हैं। 

इसके अनुसार जिन पर फिक्सिंग से संबंधित अधिक गंभीर आरोप लगाए गए हैं उन्हें अस्थायी तौर पर निलंबित किया गया है तथा उन्हें अनुशासनात्मक प्रक्रिया पूरी होने तक बीसीबी, आइसीसी या आइसीसी के सदस्य संघों द्वारा आयोजित क्रिकेट गतिविधियों में भाग लेने से तुरंत प्रभाव से रोक दिया गया है। जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं उन्हें खुद का बचाव करने के लिए 14 दिन का समय दिया गया है।

जाहिर है कि अभी आइपीएल फिक्सिंग कांड की जांच जारी ही है और इससे पहले कि कोई बड़े नतीजे सामने आते, विश्व के दूसरे कोनों से फिक्सिंग की ताजा खबरें आए दिन फैंस को दहलाती रहती हैं। हाल में पाकिस्तान के कैरेबियाई दौरे पर भी यही सवाल उठे थे जिसमें पाक टीम के खेलने के रवैये को संकेत माना गया था, इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय हो या घरेलू टूर्नामेंट, आए दिन एक नया कांड सामने आ ही रहा है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या फिक्सिंग के इस जाल पर आइसीसी काबू पाने में सक्षम है या फिर पूरी तरह से असमक्षम और बेबस।

Original Found Here... http://www.jagran.com/cricket/headlines-why-fixing-is-uncontrollable-now-fixing-in-bpl-10646300.html

Is Dhawan Shining A End Career For Sehwag And Gambhir


Shikhar Dhawan

(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। कहते हैं कि हर सफर की एक मंजिल होती है और हर रास्ते का एक अंत..खेल भी उसी सफर की ही तरह है जहां बादशाहत, जलवा, फिटनेस, और फॉर्म जैसी चीजें आती तो हैं लेकिन हमेशा केलिए नहीं ठहरती। भारतीय क्रिकेट में हमनें कई दिग्गजों को विश्व स्तर पर अपनी छाप छोड़ते हुए देखा और उसी सफर में दिल्ली के वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर भी एक थे..जी हां, 'थे'..इस शब्द का प्रयोग पता नहीं कितने क्रिकेट फैंस को सही लगेगा लेकिन मौजूदा समय में शिखर धवन ने जिस अंदाज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर धूम मचाई है उससे एक बड़ा सवाल अब सामने है कि, क्या यही है सहवाग और गंभीर के करियर का अंत? अभ्यास मैचों व कुछ घरेलू मैचों में गंभीर के फॉर्म और उनकी उम्र को देखते हुए शायद उन्हें दोबारा मौका मिल भी जाए लेकिन सहवाग की वापसी अब मुश्किल ही नजर आ रही है। इनमें से एक को धवन बाएं हाथ के बल्लेबाज (गंभीर) के रूप में चुनौती दे रहे हैं जबकि दूसरे (वीरू) को आक्रामकता के लिहाज से।

यह सही है कि 34 वर्षीय वीरेंद्र सहवाग और 31 वर्षीय गौतम गंभीर उम्र के इस पड़ाव में भी अपने अनुभव और हुनर के दम पर वापसी करके अपने करियर के अंतिम कुछ सालों को एक बेहतरीन रूप दे सकते हैं लेकिन यह सच है कि भारतीय क्रिकेट में हर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर नहीं हो पाता और हर क्रिकेटर को सचिन की तरह मौके भी नहीं मिलते रहते। महेंद्र सिंह धौनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने जो युवा रूप अख्तियार किया है उसकी आदत अब फैंस को भी हो चुकी है और धौनी भी इसको लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते, टीम से आज सचिन, लक्ष्मण, द्रविड़, गांगुली, सहवाग, युवराज, गंभीर, हरभजन और जहीर जैसे दिग्गज नदारद हैं लेकिन फिर भी हमनें विदेश में तीन बड़े खिताब जीतकर इतिहास रचा है..फैंस के लिए अपने स्टार्स को लेकर भावनाएं माएने जरूर रखती हैं लेकिन यह हकीकत है कि जब देश जीत के अभियान पर हो तो इन बातों को नजरअंदाज करने में फैंस जरा भी देर नहीं लगाते।

Original Found Here... http://www.jagran.com/cricket/headlines-is-dhawan-shining-a-end-career-for-sehwag-and-gambhir-10643453.html

Dumped SAI Preparations A Scare For Indian Medal Prospects

Jitendra Singh

नई दिल्ली। ओलंपिक हों, कॉमनवेल्थ गेम्स हों या फिर एशियन गेम्स..भारत को हर बड़ी प्रतियोगिता में अपने खिलाड़ियों से मेडल चाहिए। स्वर्ण मिल जाए तो बहुत बढि़या, वरना रजत या कांस्य तो मिलना ही चाहिए..क्या यह उम्मीदें जायज हैं? हकीकत पर गौर फरमाएं तो यह उम्मीदें बेइमानी ही नजर आती हैं। केंद्र सरकार ने आज माना है कि भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) और खेल स्टेडियमों में प्रशिक्षकों की कमी है और तो और 1993 से कोचों की भर्ती तक नहीं हुई है। वहीं, खेल मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स व एशियन गेम्स की तैयारियों को लेकर नाराजगी जाहिर की है।

युवा मामलों व खेल राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में कमला देवी और एसएस रामासुब्बू के सवालों के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विभिन्न खेल विधाओं में कोचों की कमी का मुख्य कारण 1993 से साइ में कोचों की भर्ती ना होना है। वहीं, खेल मंत्री ने जब 2014 में ग्लासगो में होने वाले कॉमवेल्थ गेम्स व इंचियोन (सियोल) में होने वाले एशियन गेम्स की तैयारियों का जायजा लिया तो वह भी हताश रह गए। सोमवार को साइ अधिकारियों की बैठक लेते हुए खेल मंत्री जितेंद्र सिंह ने तैयारियों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और कुछ ही खेल संघों द्वारा अब तक ट्रेनिंग प्रोग्राम व संभावित पदक विजेताओं की सूची देने पर भी अपनी चिंता व्यक्त की। 

खेल मंत्री ने तो अधिकारियों को कमर कस लेने और तैयारियों में जुट जाने का आदेश जारी कर दिया है लेकिन अब सवाल यही है कि इतने कम समय में कैसे उन खिलाड़ियों को तैयार किया जाएगा जो विश्व स्तर के मंच पर भारत को पदक जिता सकेंगे। 

Original Found Here.. http://www.jagran.com/news/sports-dumped-sai-preparations-a-scare-for-indian-medal-prospects-10625713.html

Monday, August 12, 2013

Negi Beats Yuki in World Chess Championship


Parimarjan Negi

ट्रोम्सो (नार्वे)। दुनिया के दूसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर भारत के परिमार्जन नेगी ने विश्व शतरंज कप के पहले दौर में अपने से बेहतर रैंकिंग वाले यूक्रेन के युकी क्रिवोरूचको को हराया। हाल में पोलिटिकेन कप में 10 में से नौ अंक जुटाकर खिताब जीतने वाले नेगी को क्रिवोरूचको कोई चुनौती नहीं दे पाए।

इस नॉकआउट प्रतियोगिता के पहले दौर में भारत के लिए दिन मिश्रित सफलता वाला रहा। बी अधिबान ने अपने से बेहतर रैंकिंग वाले ग्रैंडमास्टर येवेगनी एलेक्सीव को ड्रॉ पर रोका, जबकि कृष्णन शशिकिरण ने रोमानिया के ग्रैंडमास्टर कोंस्टैंटिन लूपुलेस्क्यू के साथ अंक बांटे। भारतीय चैंपियन जी आकाश को हालांकि दो मैचों के राउंड के पहले मुकाबले में इटली के फाबियानो कारूआना के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा। आकाश को अगर 128 खिलाड़ियों की इस प्रतियोगिता में बने रहना है तो दूसरा मुकाबला हर हाल में जीतना होगा। 

नेगी पहले दिन आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे, जिन्होंने काले मोहरों से खेलते हुए क्रिवोरूचको को खेल के सभी विभागों में मात दी। क्रिवोरूचको को अगली बाजी काले मोहरों से खेलनी है और होड़ में बने रहने के लिए उन्हें जीत हासिल करनी होगी।

Original Found Here... http://www.jagran.com/news/sports-negi-beats-yuki-in-world-chess-championship-10643359.html

Dhawan Made Several Records But Will Regret Missing Those 20 Runs


Shikhar Dhawan

नई दिल्ली। शिखर धवन भारतीय क्रिकेट के नए 'शिखर पुरुष' बनने की ओर अग्रसर हैं। भारतीय क्रिकेट की नई सनसनी धवन ने सोमवार को प्रिटोरिया में 248 रनों की तूफानी पारी खेलकर लिस्ट ए' (सीमित ओवर के मैच) मैचों में भारत की तरफ से सर्वाधिक व्य1ितगत पारी खेलने का नया रिकॉर्ड बनाया, लेकिन वह विश्व रिकॉर्ड से 20 रन पीछे रह गए। वीरेंद्र सहवाग के नाम वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक पारी में सबसे अधिक रन का रिकॉर्ड बरकरार है, लेकिन 'लिस्ट ए' में अब भारत की तरफ से सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी का रिंकॉर्ड धवन के नाम दर्ज हो गया है। बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने अपनी पारी में 150 गेंदों का सामना किया तथा 30 चौके और 7 छक्के लगाए।

सलामी बल्लेबाज धवन ने भारत 'ए' की तरफ से दक्षिण अफ्रीका 'ए' के खिलाफ त्रिकोणीय सीरीज के मैच में यह धुआंधार पारी खेलकर सहवाग के वेस्टइंडीज के खिलाफ 8 दिसंबर, 2011 को इंदौर में बनाए गए 219 रन के रिकॉर्ड को तोड़ा। धवन के पास इंग्लैंड के एलिस्टेयर ब्राउन के 268 रन के रिकॉर्ड को तोडऩे का सुनहरा मौका था, लेकिन वह 45वें ओवर में आउट हो गए। धवन 'लिस्ट ए' मैचों में दोहरा शतक जडऩे वाले 12वें बल्लेबाज हैं। ब्राउन ने दो दोहरे शतक लगाए हैं। इस तरह से 'लिस्ट ए' में 13वीं बार किसी बल्लेबाज ने दोहरा शतक जमाया। धवन, सचिन तेंदुलकर और सहवाग के बाद 'लिस्ट ए' मैचों में दोहरा शतक जडने वाले तीसरे भारतीय बल्लेबाज हैं। धवन ने इसी साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 187 रन की धमाकेदार पारी खेलकर टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। उसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह पिछले दिनों आइसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज बने थे।

Original Found Here... http://www.jagran.com/cricket/headlines-dhawan-made-several-records-but-will-regret-missing-those-20-runs-10643364.html

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