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Tuesday, October 29, 2013

Highcourt Serious On SP Workers Mess


Lucknow

इलाहाबाद(जागरण ब्यूरो)। जिस दिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ के लामार्टिनियर ग्राउंड पर शपथ ली, उसी दिन से चालू समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं की दबंगई का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। दबंगई के एक मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि दबंगों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई। याचिका की अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी तथा न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी की खंडपीठ कर रही है।

सपा के दबंग कार्यकर्ताओं से सुरक्षा की गुहार लगाते हुए इलाहाबाद में कन्नौज कनकपुर गांव के कल्याण सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली है। याची का कहना है कि सपा कार्यकताओं ने उसके घर में घुसकर लड़कियों से छेड़छाड़ की व दुराचार का प्रयास किया। वे कन्नौज में उसके पैतृक निवास का मकान व जमीन हड़पने के लिए दबंगई कर रहे हैं।

याची के बच्चे सराय इनायत इलाहाबाद कोल्ड स्टोरेज में रहते हैं और व्यवसाय कर रहे हैं। आरोप है कि फूलपुर में हुए सपा कार्यकर्ताओं के सम्मेलन के दौरान खुद को मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड का सदस्य बताने वाले कुछ कार्यकर्ताओं ने याची के इलाहाबाद स्थित आवास में घुसकर लड़कियों से छेड़छाड़ की। इसकी शिकायत पुलिस को किये जाने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। याचिका में जगदीश सिंह, आकाश सिंह, हल्लू सिंह के साथ ही सपा महिला इकाई की अध्यक्ष सरोजा देवी को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिका में सुरक्षा देने तथा अपराधी तत्वों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही किये जाने की मांग की गयी है। 

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चार पुलिस कर्मियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारण्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बलिया में तैनात रहे एसपी सहित डेढ़ दर्जन से अधिक पुलिस अधिकारियों को पुलिस अभिरक्षा में मौत मामले में बरी करने के फैसले के खिलाफ सरकार की अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने तत्कालीन डिप्टी एसपी विजय मोहन श्रीवास्तव, थानाध्यक्ष राम बरई यादव व कास्टेबल राम प्रवेश यादव व चन्द्र भूषण तिवारी के विरुद्ध गिरफ्तारी वारण्ट जारी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अन्य आरोपी पुलिस अधिकारियों को अपर सत्र न्यायालय बलिया के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश इन अधिकारियों की तरफ से अपील पर अधिवक्ता के मौजूद होने के कारण दिया है। जो अपील की सुनवाई के समय हाजिर नही थे उनके विरुद्ध वारण्ट जारी किया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि आरोपी 28 नवम्बर तक अधीनस्थ न्यायालय में उपस्थित होकर बाण्ड नहीं भरते तो संबंधित कोर्ट इन्हें हाजिर करने के लिए कदम उठाने को स्वतंत्र होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति धरणीधर झा तथा न्यायमूर्ति पंकज नकवी की खण्डपीठ ने राज्य सरकार एवं उमेश चन्द्र मिश्र की आपराधिक अपीलों पर दिया है। मालूम हो कि 6/7 अप्रैल 1995 की शाम अटल बिहारी मिश्र व ज्ञान प्रकाश मिश्र अपने गांव प्रेम राजा जा रहे थे। रास्ते में पुलिस ने रोका और थाने ले गये। उस समय ग्राम प्रधानी का चुनाव चल रहा था। पुलिस ने प्रधान पद के प्रत्याशी और सुरेश मिश्र व उमेश मिश्र नामक युवकों को भी पकड़ा। आरोप है कि एसपी की मौजूदगी में पुलिस ने सभी की पिटाई की। दूसरे दिन 8 अप्रैल को अटल बिहारी की लाश खेत में मिली पुलिस ने जिसका दाह संस्कार भी कर दिया। मृतक बीएचयू का छात्र था। आंदोलन के चलते केस दर्ज हुआ और सत्र न्यायालय ने 15 आरोपी पुलिस कर्मियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया जिसके खिलाफ अपीलें दाखिल की गयी हैं।

Source- News in Hindi

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